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सहीह मुस्लिम

नंबर 4955

नंबर 4955किताब 33, नंबर 250अरबी नंबरिंग 1037.03
حَدَّثَنَا مَنْصُورُ بْنُ أَبِي مُزَاحِمٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمْزَةَ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَزِيدَ، بْنِ جَابِرٍ أَنَّ عُمَيْرَ بْنَ هَانِئٍ، حَدَّثَهُ قَالَ سَمِعْتُ مُعَاوِيَةَ، عَلَى الْمِنْبَرِ يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ لاَ تَزَالُ طَائِفَةٌ مِنْ أُمَّتِي قَائِمَةً بِأَمْرِ اللَّهِ لاَ يَضُرُّهُمْ مَنْ خَذَلَهُمْ أَوْ خَالَفَهُمْ حَتَّى يَأْتِيَ أَمْرُ اللَّهِ وَهُمْ ظَاهِرُونَ عَلَى النَّاسِ ‏"‏ ‏.‏
It his been narrated on the authority of Umair b. Umm Hani who said:I heard Mu'awiya say (while delivering a sermon from the pulpit) that he heard the Messenger of Allah (ﷺ) say: A group of people from my Umma will continue to obey Allah's Command, and those who desert or oppose them shall not be able to do them any harm. They will be dominating the peeple until Allah's Command is executed (i. e. Resurrection is established)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book on Government

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।