सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 4953

नंबर 4953किताब 33, नंबर 248अरबी नंबरिंग 1922
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَمُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ سِمَاكِ بْنِ حَرْبٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ لَنْ يَبْرَحَ هَذَا الدِّينُ قَائِمًا يُقَاتِلُ عَلَيْهِ عِصَابَةٌ مِنَ الْمُسْلِمِينَ حَتَّى تَقُومَ السَّاعَةُ ‏"‏ ‏.‏
It has been narrated on the authority of Jabir b. Samura that the Prophet (ﷺ) said:This religion will continue to exist, and a group of people from the Muslims will continue to fight for its protection until the Hour is established

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book on Government

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।