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सहीह मुस्लिम

नंबर 4932

नंबर 4932किताब 33, नंबर 227अरबी नंबरिंग 1911.01
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ كُنَّا مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فِي غَزَاةٍ فَقَالَ ‏ "‏ إِنَّ بِالْمَدِينَةِ لَرِجَالاً مَا سِرْتُمْ مَسِيرًا وَلاَ قَطَعْتُمْ وَادِيًا إِلاَّ كَانُوا مَعَكُمْ حَبَسَهُمُ الْمَرَضُ ‏"‏ ‏.‏
It has been narrated on the authority of Jabir who said:We were with the Prophet (ﷺ) on an expedition. He said: There are some people in Medina. They are with you whenever you cover a distance or cross a valley. They have been detained by illness

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book on Government

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।