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सहीह मुस्लिम

नंबर 4924

नंबर 4924किताब 33, नंबर 219अरबी नंबरिंग 1905.02
وَحَدَّثَنَاهُ عَلِيُّ بْنُ خَشْرَمٍ، أَخْبَرَنَا الْحَجَّاجُ، - يَعْنِي ابْنَ مُحَمَّدٍ - عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، حَدَّثَنِي يُونُسُ بْنُ يُوسُفَ، عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ، قَالَ تَفَرَّجَ النَّاسُ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، فَقَالَ لَهُ نَاتِلُ الشَّامِ وَاقْتَصَّ الْحَدِيثَ بِمِثْلِ حَدِيثِ خَالِدِ بْنِ الْحَارِثِ ‏.‏
This tradition has been handed down through a different chain of transmitters

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book on Government

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।