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सहीह मुस्लिम

नंबर 4888

नंबर 4888किताब 33, नंबर 184अरबी नंबरिंग 1888.03
وَحَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الدَّارِمِيُّ، أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ، عَنِ الأَوْزَاعِيِّ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، بِهَذَا الإِسْنَادِ فَقَالَ ‏"‏ وَرَجُلٌ فِي شِعْبٍ ‏"‏ ‏.‏ وَلَمْ يَقُلْ ‏"‏ ثُمَّ رَجُلٌ ‏"‏ ‏.‏
A version of the tradition narrated on the authority of Ibn Shihab has a little differently worded ending. i. e." A man in a mountain valley." but did not mention" next to him a man who

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book on Government

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।