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सहीह मुस्लिम

नंबर 4878

नंबर 4878किताब 33, नंबर 174अरबी नंबरिंग 1883.02
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ قُهْزَاذَ، حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْحَسَنِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْمُبَارَكِ، أَخْبَرَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي أَيُّوبَ، وَحَيْوَةُ بْنُ شُرَيْحٍ، قَالَ كُلُّ وَاحِدٍ مِنْهُمَا حَدَّثَنِي شُرَحْبِيلُ بْنُ، شَرِيكٍ عَنْ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْحُبُلِيِّ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا أَيُّوبَ الأَنْصَارِيَّ، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِمِثْلِهِ سَوَاءً ‏.‏
This tradition has been narrated on the authority of Abu Ayyub through a different chain of transmitters having the same wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book on Government

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।