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सहीह मुस्लिम

नंबर 4857

नंबर 4857किताब 33, नंबर 153अरबी नंबरिंग 1875.02
وَحَدَّثَنَاهُ مُحَمَّدُ بْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي ح، وَحَدَّثَنِي عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ بِشْرٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ، الرَّزَّاقِ جَمِيعًا عَنْ سُفْيَانَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ مِثْلَهُ وَزَادَ فِي حَدِيثِ عَبْدِ الرَّزَّاقِ وَالشِّكَالُ أَنْ يَكُونَ الْفَرَسُ فِي رِجْلِهِ الْيُمْنَى بَيَاضٌ وَفِي يَدِهِ الْيُسْرَى أَوْ فِي يَدِهِ الْيُمْنَى وَرِجْلِهِ الْيُسْرَى ‏.‏
This tradition has been narrated on the authority of Sufyan with the addition from Abd ar-Razzaq (one of the narrators) explaining the meaning of shikal as a bone whose right back foot and left front foot or left back foot and right front foot are white

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book on Government

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।