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सहीह मुस्लिम

नंबर 4847

नंबर 4847किताब 33, नंबर 143अरबी नंबरिंग 1872.01
وَحَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ، وَصَالِحُ بْنُ حَاتِمِ بْنِ وَرْدَانَ، جَمِيعًا عَنْ يَزِيدَ، - قَالَ الْجَهْضَمِيُّ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ، - حَدَّثَنَا يُونُسُ بْنُ عُبَيْدٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ أَبِي زُرْعَةَ بْنِ عَمْرِو بْنِ جَرِيرٍ، عَنْ جَرِيرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَلْوِي نَاصِيَةَ فَرَسٍ بِإِصْبَعِهِ وَهُوَ يَقُولُ ‏ "‏ الْخَيْلُ مَعْقُودٌ بِنَوَاصِيهَا الْخَيْرُ إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ الأَجْرُ وَالْغَنِيمَةُ ‏"‏ ‏.‏
It has been narrated on the authority of Jarir b. Abdullah who said:I saw that the Messenger of Allah (ﷺ) was twisting the forelock of a horse with his fingers and he was saying: (A great) benefit. i. e. reward (for rearing them for Jihad) and spoils of war, has been tied to the forelocks of horses until the Day of Judgment

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book on Government

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।