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सहीह मुस्लिम

नंबर 4842

नंबर 4842किताब 33, नंबर 138अरबी नंबरिंग 1869.04
حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ يَعْنِي ابْنَ عُلَيَّةَ، ح وَحَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، وَالثَّقَفِيُّ، كُلُّهُمْ عَنْ أَيُّوبَ، ح وَحَدَّثَنَا ابْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي فُدَيْكٍ، أَخْبَرَنَا الضَّحَّاكُ، - يَعْنِي ابْنَ عُثْمَانَ - جَمِيعًا عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ فِي حَدِيثِ ابْنِ عُلَيَّةَ وَالثَّقَفِيِّ ‏"‏ فَإِنِّي أَخَافُ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ سُفْيَانَ وَحَدِيثِ الضَّحَّاكِ بْنِ عُثْمَانَ ‏"‏ مَخَافَةَ أَنْ يَنَالَهُ الْعَدُوُّ ‏"‏ ‏.‏
The above hadith has been narrated through several other chains with slight differences of wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book on Government

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।