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सहीह मुस्लिम

नंबर 4836

नंबर 4836किताब 33, नंबर 132अरबी नंबरिंग 1867
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ، وَقُتَيْبَةُ، وَابْنُ، حُجْرٍ - وَاللَّفْظُ لاِبْنِ أَيُّوبَ - قَالُوا حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، - وَهُوَ ابْنُ جَعْفَرٍ - أَخْبَرَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ دِينَارٍ، أَنَّهُ سَمِعَ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ، يَقُولُ كُنَّا نُبَايِعُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَلَى السَّمْعِ وَالطَّاعَةِ يَقُولُ لَنَا ‏ "‏ فِيمَا اسْتَطَعْتَ ‏"‏ ‏.‏
It has been narrated on the authority of Abdullah b. 'Umar who said:We used to take oath to the Messenger of Allah (ﷺ) that we would listen to and obey his orders. He would tell us (to say in the oath): As far as it lies in my power

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book on Government

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।