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सहीह मुस्लिम

नंबर 4808

नंबर 4808किताब 33, नंबर 105अरबी नंबरिंग 1856.02
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا ابْنُ عُيَيْنَةَ، ح وَحَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ لَمْ نُبَايِعْ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَلَى الْمَوْتِ إِنَّمَا بَايَعْنَاهُ عَلَى أَنْ لاَ نَفِرَّ ‏.‏
It has been narrated (through a different chain of transmitters) on the authority of Jabir who said:While swearing fealty to the Prophet (ﷺ) we did not take the oath to death but that we would not run away (from the battlefield)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book on Government

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।