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सहीह मुस्लिम

नंबर 4802

नंबर 4802किताब 33, नंबर 99अरबी नंबरिंग 1854.03
وَحَدَّثَنِي أَبُو الرَّبِيعِ الْعَتَكِيُّ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، - يَعْنِي ابْنَ زَيْدٍ - حَدَّثَنَا الْمُعَلَّى بْنُ، زِيَادٍ وَهِشَامٌ عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ ضَبَّةَ بْنِ مِحْصَنٍ، عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ، قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ بِنَحْوِ ذَلِكَ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ فَمَنْ أَنْكَرَ فَقَدْ بَرِئَ وَمَنْ كَرِهَ فَقَدْ سَلِمَ ‏"‏ ‏.‏
Another version of the tradition narrated on the same authority attributes the same words to the Messenger of Allah (ﷺ) except that it replaces kariha with ankhara and vice versa

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book on Government

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।