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सहीह मुस्लिम

नंबर 4787

नंबर 4787किताब 33, नंबर 84अरबी नंबरिंग 1848.02
وَحَدَّثَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ الْقَوَارِيرِيُّ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، حَدَّثَنَا أَيُّوبُ، عَنْ غَيْلاَنَ، بْنِ جَرِيرٍ عَنْ زِيَادِ بْنِ رِيَاحٍ الْقَيْسِيِّ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِنَحْوِ حَدِيثِ جَرِيرٍ وَقَالَ ‏ "‏ لاَ يَتَحَاشَى مِنْ مُؤْمِنِهَا ‏"‏ ‏.‏
The same tradition has been narrated by the same authority through another chain of transmitters with a slight difference in wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book on Government

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।