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सहीह मुस्लिम

नंबर 4741

नंबर 4741किताब 33, नंबर 40अरबी नंबरिंग 1832.04
وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا عَبْدَةُ، وَابْنُ، نُمَيْرٍ وَأَبُو مُعَاوِيَةَ ح وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ، أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحِيمِ بْنُ سُلَيْمَانَ، ح وَحَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، كُلُّهُمْ عَنْ هِشَامٍ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ عَبْدَةَ وَابْنِ نُمَيْرٍ فَلَمَّا جَاءَ حَاسَبَهُ ‏.‏ كَمَا قَالَ أَبُو أُسَامَةَ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ ابْنِ نُمَيْرٍ ‏ "‏ تَعْلَمُنَّ وَاللَّهِ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لاَ يَأْخُذُ أَحَدُكُمْ مِنْهَا شَيْئًا ‏"‏ ‏.‏ وَزَادَ فِي حَدِيثِ سُفْيَانَ قَالَ بَصُرَ عَيْنِي وَسَمِعَ أُذُنَاىَ ‏.‏ وَسَلُوا زَيْدَ بْنَ ثَابِتٍ فَإِنَّهُ كَانَ حَاضِرًا مَعِي ‏.‏
This tradition has been hanoed down through a different chain of transmitters on the authority of Hisham with aslight variation in the wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book on Government

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।