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सहीह मुस्लिम

नंबर 4736

नंबर 4736किताब 33, नंबर 35अरबी नंबरिंग 1831.03
وَحَدَّثَنِي أَحْمَدُ بْنُ سَعِيدِ بْنِ صَخْرٍ الدَّارِمِيُّ، حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، - يَعْنِي ابْنَ زَيْدٍ - عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ أَبِي زُرْعَةَ بْنِ عَمْرِو بْنِ جَرِيرٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ ذَكَرَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم الْغُلُولَ فَعَظَّمَهُ ‏.‏ وَاقْتَصَّ الْحَدِيثَ قَالَ حَمَّادٌ ثُمَّ سَمِعْتُ يَحْيَى بَعْدَ ذَلِكَ يُحَدِّثُهُ فَحَدَّثَنَا بِنَحْوِ مَا حَدَّثَنَا عَنْهُ أَيُّوبُ ‏.‏
Abu Huraira has narrated this hadith with a slight variation of words

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book on Government

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।