وَحَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ حَبِيبٍ الْحَارِثِيُّ، حَدَّثَنَا رَوْحٌ، حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، حَدَّثَنِي أَبُو الزُّبَيْرِ أَنَّهُ سَمِعَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، يَقُولُ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم " النَّاسُ تَبَعٌ لِقُرَيْشٍ فِي الْخَيْرِ وَالشَّرِّ " .
It has been narrated on the authority of Jabir b. 'Abdullah that the Messenger of Allah (ﷺ) said:People are the followers of Quraish in good as well as evil (i. e. in the customs of Islamic as well as pre-Islamic times)
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।