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सहीह मुस्लिम

नंबर 4693

नंबर 4693किताब 32, नंबर 175अरबी नंबरिंग 1254.03
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ، حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ زَيْدِ بْنِ أَرْقَمَ، سَمِعَهُ مِنْهُ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم غَزَا تِسْعَ عَشْرَةَ غَزْوَةً وَحَجَّ بَعْدَ مَا هَاجَرَ حَجَّةً لَمْ يَحُجَّ غَيْرَهَا حَجَّةَ الْوَدَاعِ ‏.‏
It has been narrated on the authority of Zaid b. Arqam that the Messenger of Allah (ﷺ) fought nineteen battles and after the Migration performed only one Pilgrimage called Hajjat-ul-Wada

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।