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सहीह मुस्लिम

नंबर 4687

नंबर 4687किताब 32, नंबर 169अरबी नंबरिंग 1812.04
وَحَدَّثَنَاهُ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ بِشْرٍ الْعَبْدِيُّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ أُمَيَّةَ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي سَعِيدٍ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ هُرْمُزَ، قَالَ كَتَبَ نَجْدَةُ إِلَى ابْنِ عَبَّاسٍ ‏.‏ وَسَاقَ الْحَدِيثَ بِمِثْلِهِ ‏.‏ قَالَ أَبُو إِسْحَاقَ حَدَّثَنِي عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ بِشْرٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، بِهَذَا الْحَدِيثِ بِطُولِهِ
This hadith has been narrated on the authority of Yazid b. Hurmuz through another chain of transmitters

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।