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सहीह मुस्लिम

नंबर 4682

नंबर 4682किताब 32, नंबर 164अरबी नंबरिंग 1810
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا جَعْفَرُ بْنُ سُلَيْمَانَ، عَنْ ثَابِتٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَغْزُو بِأُمِّ سُلَيْمٍ وَنِسْوَةٍ مِنَ الأَنْصَارِ مَعَهُ إِذَا غَزَا فَيَسْقِينَ الْمَاءَ وَيُدَاوِينَ الْجَرْحَى ‏.‏
It has been narrated on the authority of Anas b. Malik who said that the Messenger of Allah (ﷺ) allowed Umm Sulaim and some other women of the Ansar to accompany him when he went to war; they would give water (to the soldiers) and would treat the wounded

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।