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सहीह मुस्लिम

नंबर 4674

नंबर 4674किताब 32, नंबर 156अरबी नंबरिंग 1805.02
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَابْنُ، بَشَّارٍ قَالَ ابْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ، عَنْ قَتَادَةَ، حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقُولُ ‏"‏ اللَّهُمَّ إِنَّ الْعَيْشَ عَيْشُ الآخِرَةِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ شُعْبَةُ أَوْ قَالَ ‏"‏ اللَّهُمَّ لاَ عَيْشَ إِلاَّ‎عَيْشُ الآخِرَهْ فَأَكْرِمِ الأَنْصَارَ وَالْمُهَاجِرَهْ ‏"‏ ‏.‏
According to another version of the tradition, reported on the authority of Anas b. Malik, the Messenger of Allah (may peace he upon him) is reported to have said:O God, there is no life but the life of the Hereafter, So grant honour to the Ansar and the Muhajirs

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।