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सहीह मुस्लिम

नंबर 4644

नंबर 4644किताब 32, नंबर 126अरबी नंबरिंग 1790.03
وَحَدَّثَنَاهُ أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَابْنُ، أَبِي عُمَرَ جَمِيعًا عَنِ ابْنِ عُيَيْنَةَ، ح وَحَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ سَوَّادٍ الْعَامِرِيُّ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ، وَهْبٍ أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ الْحَارِثِ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي هِلاَلٍ، ح وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ سَهْلٍ التَّمِيمِيُّ، حَدَّثَنِي ابْنُ أَبِي مَرْيَمَ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ، - يَعْنِي ابْنَ مُطَرِّفٍ - كُلُّهُمْ عَنْ أَبِي حَازِمٍ، عَنْ سَهْلِ، بْنِ سَعْدٍ ‏.‏ بِهَذَا الْحَدِيثِ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ فِي حَدِيثِ ابْنِ أَبِي هِلاَلٍ أُصِيبَ وَجْهُهُ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ ابْنِ مُطَرِّفٍ جُرِحَ وَجْهُهُ ‏.‏
The same tradition has been narrated on the authority of Sahl b. Sa'd through a different chain of transmitters with a slight difference in the wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।