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सहीह मुस्लिम

नंबर 4635

नंबर 4635किताब 32, नंबर 117अरबी नंबरिंग 1785.03
وَحَدَّثَنَاهُ عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَإِسْحَاقُ، جَمِيعًا عَنْ جَرِيرٍ، ح وَحَدَّثَنِي أَبُو سَعِيدٍ، الأَشَجُّ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، كِلاَهُمَا عَنِ الأَعْمَشِ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِهِمَا إِلَى أَمْرٍ يُفْظِعُنَا.‏
The same tradition has been narrated through a different chain of transmitters on the authority of A'mash. This version contains the words:Ila amrin yofzi'una instead of Ila amrin na'rifuhu

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।