सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 4623

नंबर 4623किताब 32, नंबर 105अरबी नंबरिंग 1780.02
وَحَدَّثَنِيهِ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ هَاشِمٍ، حَدَّثَنَا بَهْزٌ، حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ الْمُغِيرَةِ، بِهَذَا الإِسْنَادِ وَزَادَ فِي الْحَدِيثِ ثُمَّ قَالَ بِيَدَيْهِ إِحْدَاهُمَا عَلَى الأُخْرَى ‏"‏ احْصُدُوهُمْ حَصْدًا ‏"‏ ‏.‏ وَقَالَ فِي الْحَدِيثِ قَالُوا قُلْنَا ذَاكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ ‏"‏ فَمَا اسْمِي إِذًا كَلاَّ إِنِّي عَبْدُ اللَّهِ وَرَسُولُهُ ‏"‏ ‏.‏
The tradition has been narrated by a different chain of transmitters with the following additions:(i) Then be (the Messenger of Allah) said with his hands one upon the other: Kill them (who stand in your way).... (ii) They (the Ansar) replied: We said so, Messenger of Allah! He said: What is my name? I am but Allah's bondman and His Messenger

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।