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सहीह मुस्लिम

नंबर 4614

नंबर 4614किताब 32, नंबर 96अरबी नंबरिंग 1775.03
وَحَدَّثَنَاهُ ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، قَالَ أَخْبَرَنِي كَثِيرُ، بْنُ الْعَبَّاسِ عَنْ أَبِيهِ، قَالَ كُنْتُ مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم يَوْمَ حُنَيْنٍ ‏.‏ وَسَاقَ الْحَدِيثَ ‏.‏ غَيْرَ أَنَّ حَدِيثَ يُونُسَ وَحَدِيثَ مَعْمَرٍ أَكْثَرُ مِنْهُ وَأَتَمُّ ‏.‏
Abbas reported:I was with Allah's Apostle (ﷺ) on the Day of Hunain. The rest of the hadith is the same but with this variation that the hadith transmitted by Yonus and Ma'mar is more detailed and complete

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।