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सहीह मुस्लिम

नंबर 4609

नंबर 4609किताब 32, नंबर 91अरबी नंबरिंग 1774.01
حَدَّثَنِي يُوسُفُ بْنُ حَمَّادٍ الْمَعْنِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الأَعْلَى، عَنْ سَعِيدٍ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسٍ، أَنَّ نَبِيَّ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَتَبَ إِلَى كِسْرَى وَإِلَى قَيْصَرَ وَإِلَى النَّجَاشِيِّ وَإِلَى كُلِّ جَبَّارٍ يَدْعُوهُمْ إِلَى اللَّهِ تَعَالَى وَلَيْسَ بِالنَّجَاشِيِّ الَّذِي صَلَّى عَلَيْهِ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
अनस रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने किसरा, क़ैसर, नजाशी और हर बड़े शासक को उच्च एवं महान अल्लाह की ओर बुलाते हुए पत्र लिखा, और यह वह नजाशी नहीं थे, जिनकी नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने जनाज़े की नमाज़ पढ़ी थी।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।