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सहीह मुस्लिम

नंबर 4590

नंबर 4590किताब 32, नंबर 71अरबी नंबरिंग 1764.02
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ الْحَنَفِيُّ، حَدَّثَنِي عَبْدُ الْحَمِيدِ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنِي سَعِيدُ بْنُ أَبِي سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيُّ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ بَعَثَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم خَيْلاً لَهُ نَحْوَ أَرْضِ نَجْدٍ فَجَاءَتْ بِرَجُلٍ يُقَالُ لَهُ ثُمَامَةُ بْنُ أُثَالٍ الْحَنَفِيُّ سَيِّدُ أَهْلِ الْيَمَامَةِ ‏.‏ وَسَاقَ الْحَدِيثَ بِمِثْلِ حَدِيثِ اللَّيْثِ إِلاَّ أَنَّهُ قَالَ إِنْ تَقْتُلْنِي تَقْتُلْ ذَا دَمٍ ‏.‏
The same tradition has been narrated by a different chain of transmitters with a slight difference in the wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।