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सहीह मुस्लिम

नंबर 4543

नंबर 4543किताब 32, नंबर 24अरबी नंबरिंग 1742.02
حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مَنْصُورٍ، حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ أَبِي خَالِدٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي أَوْفَى، قَالَ دَعَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَلَى الأَحْزَابِ فَقَالَ ‏ "‏ اللَّهُمَّ مُنْزِلَ الْكِتَابِ سَرِيعَ الْحِسَابِ اهْزِمِ الأَحْزَابَ اللَّهُمَّ اهْزِمْهُمْ وَزَلْزِلْهُمْ ‏"‏ ‏.‏
It is narrated on the authority of Ibn Abu Aufa that the Messenger of Allah (ﷺ) cursed the tribes (who had marched upon Medina with a combined force in 5 H) and said:O Allah, Revealer of the Book, swift in (taking) account, put the tribes to rout. O Lord, defeat them and shake them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।