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सहीह मुस्लिम

नंबर 4535

नंबर 4535किताब 32, नंबर 16अरबी नंबरिंग 1736.03
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ شَقِيقٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لِكُلِّ غَادِرٍ لِوَاءٌ يَوْمَ الْقِيَامَةِ يُعْرَفُ بِهِ يُقَالُ هَذِهِ غَدْرَةُ فُلاَنٍ ‏"‏ ‏.‏
It has been narrated on the authority of Abdullah that the Messenger of Allah (ﷺ) said:There will be for every perfidious person on the Day of Judgment a flag by which he will be recognised. It will be announced: Here is the breach of faith of so and so

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।