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सहीह मुस्लिम

नंबर 4528

नंबर 4528किताब 32, नंबर 9अरबी नंबरिंग 1734
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ الْعَنْبَرِيُّ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ أَبِي التَّيَّاحِ، عَنْ أَنَسٍ، ح. وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ، الْوَلِيدِ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، كِلاَهُمَا عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ أَبِي التَّيَّاحِ، قَالَ سَمِعْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ يَسِّرُوا وَلاَ تُعَسِّرُوا وَسَكِّنُوا وَلاَ تُنَفِّرُوا ‏"‏
The Messenger of Allah (may peace he upon him) has been reported by Anas b. Malik to have said:Show leniency; do not be hard; give solace and do not create aversion

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।