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सहीह मुस्लिम

नंबर 4525

नंबर 4525किताब 32, नंबर 6अरबी नंबरिंग 1732
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَأَبُو كُرَيْبٍ - وَاللَّفْظُ لأَبِي بَكْرٍ - قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ بُرَيْدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَبِي بُرْدَةَ، عَنْ أَبِي مُوسَى، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا بَعَثَ أَحَدًا مِنْ أَصْحَابِهِ فِي بَعْضِ أَمْرِهِ قَالَ ‏ "‏ بَشِّرُوا وَلاَ تُنَفِّرُوا وَيَسِّرُوا وَلاَ تُعَسِّرُوا ‏"‏ ‏.‏
It has been narrated on the authority of Abu Masa that when the Messenger of Allah (ﷺ) deputed any of his Companions on a mission, he would say:Give tidings (to the people) ; do not create (in their minds) aversion (towards religion) ; show them leniency and do not be hard upon them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।