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सहीह मुस्लिम

नंबर 4523

नंबर 4523किताब 32, नंबर 4अरबी नंबरिंग 1731.03
وَحَدَّثَنِي حَجَّاجُ بْنُ الشَّاعِرِ، حَدَّثَنِي عَبْدُ الصَّمَدِ بْنُ عَبْدِ الْوَارِثِ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، حَدَّثَنِي عَلْقَمَةُ بْنُ مَرْثَدٍ، أَنَّ سُلَيْمَانَ بْنَ بُرَيْدَةَ، حَدَّثَهُ عَنْ أَبِيهِ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا بَعَثَ أَمِيرًا أَوْ سَرِيَّةً دَعَاهُ فَأَوْصَاهُ ‏.‏ وَسَاقَ الْحَدِيثَ بِمَعْنَى حَدِيثِ سُفْيَانَ ‏.‏
Sulaiman b. Buraida repotted on the authority of his father that when Allah's Messenger (ﷺ) sent an Amir with a detachment he called him and advised him. The rest of the hadith is the same

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।