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सहीह मुस्लिम

नंबर 4515

नंबर 4515किताब 31, नंबर 17अरबी नंबरिंग 48.04
وَحَدَّثَنَاهُ مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ، - يَعْنِي الْحَنَفِيَّ - حَدَّثَنَا عَبْدُ الْحَمِيدِ، بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا سَعِيدٌ الْمَقْبُرِيُّ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا شُرَيْحٍ الْخُزَاعِيَّ، يَقُولُ سَمِعَتْ أُذُنَاىَ، وَبَصُرَ، عَيْنِي وَوَعَاهُ قَلْبِي حِينَ تَكَلَّمَ بِهِ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ فَذَكَرَ بِمِثْلِ حَدِيثِ اللَّيْثِ وَذَكَرَ فِيهِ ‏ "‏ وَلاَ يَحِلُّ لأَحَدِكُمْ أَنْ يُقِيمَ عِنْدَ أَخِيهِ حَتَّى يُؤْثِمَهُ ‏"‏ ‏.‏ بِمِثْلِ مَا فِي حَدِيثِ وَكِيعٍ ‏.‏
Sa'id al-Maqburi reported:I heard Abu Shuraih al-Khuzill saying: My ears heard and my eyes saw and my mind retained it, when Allah's Messenger (ﷺ) spok this, and he then narrated the hadith and made mention of this:" It is not permissible for any one of you to stay with his brother until he makes him sinful

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 31 · The Book of Lost Property

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।