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सहीह मुस्लिम

नंबर 4512

नंबर 4512किताब 31, नंबर 14अरबी नंबरिंग 1726.02
وَحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ رُمْحٍ، جَمِيعًا عَنِ اللَّيْثِ بْنِ سَعْدٍ، ح وَحَدَّثَنَاهُ أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ، ح وَحَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنِي أَبِي كِلاَهُمَا، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، ح وَحَدَّثَنِي أَبُو الرَّبِيعِ، وَأَبُو كَامِلٍ قَالاَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، ح وَحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، - يَعْنِي ابْنَ عُلَيَّةَ - جَمِيعًا عَنْ أَيُّوبَ، ح وَحَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ أُمَيَّةَ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، عَنْ مَعْمَرٍ،عَنْ أَيُّوبَ، وَابْنُ، جُرَيْجٍ عَنْ مُوسَى، كُلُّ هَؤُلاَءِ عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ نَحْوَ حَدِيثِ مَالِكٍ غَيْرَ أَنَّ فِي حَدِيثِهِمْ جَمِيعًا ‏"‏ فَيُنْتَثَلَ ‏"‏ ‏.‏ إِلاَّ اللَّيْثَ بْنَ سَعْدٍ فَإِنَّ فِي حَدِيثِهِ ‏"‏ فَيُنْتَقَلَ طَعَامُهُ ‏"‏ ‏.‏ كَرِوَايَةِ مَالِكٍ ‏.‏
This hadith has been narrated through another chain of transmitters with a slight variation of words

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 31 · The Book of Lost Property

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।