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सहीह मुस्लिम

नंबर 4510

नंबर 4510किताब 31, नंबर 12अरबी नंबरिंग 1725
وَحَدَّثَنِي أَبُو الطَّاهِرِ، وَيُونُسُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى، قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ الْحَارِثِ، عَنْ بَكْرِ بْنِ سَوَادَةَ، عَنْ أَبِي سَالِمٍ الْجَيْشَانِيِّ، عَنْ زَيْدِ بْنِ خَالِدٍ، الْجُهَنِيِّ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ مَنْ آوَى ضَالَّةً فَهُوَ ضَالٌّ مَا لَمْ يُعَرِّفْهَا ‏"‏ ‏.‏
Zaid b. Khalid al-Juhani reported Allah's Messenger (ﷺ) as sayin.:He who found a stray article is himself led astray if he does not advertise it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 31 · The Book of Lost Property

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।