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सहीह मुस्लिम

नंबर 4487

नंबर 4487किताब 30, नंबर 18अरबी नंबरिंग 1716.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى التَّمِيمِيُّ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ عَبْدِ، اللَّهِ بْنِ أُسَامَةَ بْنِ الْهَادِ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ بُسْرِ بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ أَبِي قَيْسٍ، مَوْلَى عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ عَنْ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ، أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِذَا حَكَمَ الْحَاكِمُ فَاجْتَهَدَ ثُمَّ أَصَابَ فَلَهُ أَجْرَانِ ‏.‏ وَإِذَا حَكَمَ فَاجْتَهَدَ ثُمَّ أَخْطَأَ فَلَهُ أَجْرٌ ‏"‏ ‏.‏
Amr b. al-'As reported that he heard Allah's Messenger (ﷺ) as saying:When a judge gives a decision, having tried his best to decide correctly and is right, there are two rewards for him; and if he gave a judgment after having tried his best (to arrive at a correct decision) but erred, there is one reward for him

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 30 · The Book of Judicial Decisions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।