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सहीह मुस्लिम

नंबर 4470

नंबर 4470किताब 30, नंबर 1अरबी नंबरिंग 1711.01
حَدَّثَنِي أَبُو الطَّاهِرِ، أَحْمَدُ بْنُ عَمْرِو بْنِ سَرْحٍ أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنِ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لَوْ يُعْطَى النَّاسُ بِدَعْوَاهُمْ لاَدَّعَى نَاسٌ دِمَاءَ رِجَالٍ وَأَمْوَالَهُمْ وَلَكِنَّ الْيَمِينَ عَلَى الْمُدَّعَى عَلَيْهِ ‏"‏ ‏.‏
Ibn Abbas reported Allah's Apostle (ﷺ) as saying:If the people were given according to their claims, they would claim the lives of persons and their properties, but the oath must be taken by the defendant

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 30 · The Book of Judicial Decisions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।