حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ الْعَنْبَرِيُّ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ صُهَيْبٍ، سَمِعَ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ، قَالَ أُقِيمَتِ الصَّلاَةُ وَالنَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يُنَاجِي رَجُلاً فَلَمْ يَزَلْ يُنَاجِيهِ حَتَّى نَامَ أَصْحَابُهُ ثُمَّ جَاءَ فَصَلَّى بِهِمْ .
Anas b. Malik reported:(The people) stood up for prayer and the Messenger of Allah (ﷺ) was talking in whispers with a man, and he did not discontinue the conversation till his Companions dozed off; he then came and led the prayer
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।