حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، - يَعْنِي ابْنَ سَعِيدٍ - قَالَ حُمَيْدٌ حَدَّثَنَا ح، وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، - وَاللَّفْظُ لَهُ - حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ ابْنُ عُلَيَّةَ، عَنْ حُمَيْدٍ الطَّوِيلِ، عَنْ أَبِي رَافِعٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّهُ لَقِيَهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فِي طَرِيقٍ مِنْ طُرُقِ الْمَدِينَةِ وَهُوَ جُنُبٌ فَانْسَلَّ فَذَهَبَ فَاغْتَسَلَ فَتَفَقَّدَهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَلَمَّا جَاءَهُ قَالَ " أَيْنَ كُنْتَ يَا أَبَا هُرَيْرَةَ " . قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ لَقِيتَنِي وَأَنَا جُنُبٌ فَكَرِهْتُ أَنْ أُجَالِسَكَ حَتَّى أَغْتَسِلَ . فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم " سُبْحَانَ اللَّهِ إِنَّ الْمُؤْمِنَ لاَ يَنْجُسُ " .
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाह अन्हु- का वर्णन है किः नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- उन्हें मदीने के किसी रास्ते में मिल गए, जबकि वह उस समय जुंबी- अपवित्र- थे। वह कहते हैंः सो मैं चुपके से निकल लिया और जाकर स्नान कर आया। आप बोलेः अबू हुरैरा! तुम इतनी देर कहाँ थे? उन्होंने जवाब दियाः मैं जुंबी था। अतः मुझे अच्छा न लगा कि नापाकी- अपवित्रता- की अवस्था में आपके पास बैठूँ! आपने फरमायाः "सुबहानल्लाह! मोमिन नापाक नहीं होता।"
जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।