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सहीह मुस्लिम

नंबर 4444

नंबर 4444किताब 29, नंबर 47अरबी नंबरिंग 1702
وَحَدَّثَنَا أَبُو كَامِلٍ الْجَحْدَرِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ، حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ الشَّيْبَانِيُّ، قَالَ سَأَلْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ أَبِي أَوْفَى ح. وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، - وَاللَّفْظُ لَهُ - حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ، عَنْ أَبِي، إِسْحَاقَ الشَّيْبَانِيِّ قَالَ سَأَلْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ أَبِي أَوْفَى هَلْ رَجَمَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ نَعَمْ ‏.‏ قَالَ قُلْتُ بَعْدَ مَا أُنْزِلَتْ سُورَةُ النُّورِ أَمْ قَبْلَهَا قَالَ لاَ أَدْرِي ‏.‏
Abu Ishaq Shaibani said:I asked 'Abdullah b. Abu Aufi if Allah's Messenger (ﷺ) awarded (the punishment) of stoning (to death). He said: Yes. I said: After Sura al-Nur was revealed or before that? He said: I do not know

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 29 · The Book of Legal Punishments

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।