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सहीह मुस्लिम

नंबर 4441

नंबर 4441किताब 29, नंबर 44अरबी नंबरिंग 1700.02
حَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، وَأَبُو سَعِيدٍ الأَشَجُّ قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ نَحْوَهُ إِلَى قَوْلِهِ فَأَمَرَ بِهِ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَرُجِمَ ‏.‏ وَلَمْ يَذْكُرْ مَا بَعْدَهُ مِنْ نُزُولِ الآيَةِ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of A'mash up to the words:" Allah's Apostle (ﷺ) pronounced judgment and he was stoned (to death)" And he mentioned nothing subsequent to that pertaining to the revelation of verses

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 29 · The Book of Legal Punishments

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।