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सहीह मुस्लिम

नंबर 4438

नंबर 4438किताब 29, नंबर 41अरबी नंबरिंग 1699.02
وَحَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، - يَعْنِي ابْنَ عُلَيَّةَ - عَنْ أَيُّوبَ، ح وَحَدَّثَنِي أَبُو الطَّاهِرِ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي رِجَالٌ، مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْهُمْ مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ أَنَّ نَافِعًا، أَخْبَرَهُمْ عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم رَجَمَ فِي الزِّنَى يَهُودِيَّيْنِ رَجُلاً وَامْرَأَةً زَنَيَا فَأَتَتِ الْيَهُودُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِهِمَا ‏.‏ وَسَاقُوا الْحَدِيثَ بِنَحْوِهِ ‏.‏
Ibn Umar reported that Allah's Messenger (ﷺ) stoned to death the Jews, both male and female, who had committed adultery. The Jews brought them to Allah's Messenger (may peace he upon him). The rest of the hadith is the same

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 29 · The Book of Legal Punishments

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।