सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 4430

नंबर 4430किताब 29, नंबर 33अरबी नंबरिंग 1694.03
وَحَدَّثَنَا سُرَيْجُ بْنُ يُونُسَ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ زَكَرِيَّاءَ بْنِ أَبِي زَائِدَةَ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ هِشَامٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، كِلاَهُمَا عَنْ دَاوُدَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ بَعْضَ هَذَا الْحَدِيثِ ‏.‏ غَيْرَ أَنَّ فِي حَدِيثِ سُفْيَانَ فَاعْتَرَفَ بِالزِّنَى ثَلاَثَ مَرَّاتٍ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Dawud with the same chain of transmitters but with this variation that in the hadith narrated by Sufyan (the words are):" He made a confession of having committed adultery, thrice

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 29 · The Book of Legal Punishments

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।