सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 4357

नंबर 4357किताब 28, नंबर 16अरबी नंबरिंग 1671.05
وَحَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ أَبِي شُعَيْبٍ الْحَرَّانِيُّ، حَدَّثَنَا مِسْكِينٌ، - وَهُوَ ابْنُ بُكَيْرٍ الْحَرَّانِيُّ - أَخْبَرَنَا الأَوْزَاعِيُّ، ح وَحَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الدَّارِمِيُّ، أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ، عَنِ الأَوْزَاعِيِّ، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ، عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ قَدِمَ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ثَمَانِيَةُ نَفَرٍ مِنْ عُكْلٍ ‏.‏ بِنَحْوِ حَدِيثِهِمْ ‏.‏ وَزَادَ فِي الْحَدِيثِ وَلَمْ يَحْسِمْهُمْ ‏.‏
Anas b. Malik reported:There came to Allah's Messenger (ﷺ) eight persons from the tribe of 'Ukl, but with this addition that he did not cauterise (the wounds which hid been inflicted upon them while punishing them)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 28 · The Book of Oaths, Muharibin, Qasas (Retaliation), and Diyat (Blood Money)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।