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सहीह मुस्लिम

नंबर 4350

नंबर 4350किताब 28, नंबर 9अरबी नंबरिंग 1670.01
حَدَّثَنِي أَبُو الطَّاهِرِ، وَحَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، قَالَ أَبُو الطَّاهِرِ حَدَّثَنَا وَقَالَ، حَرْمَلَةُ أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، أَخْبَرَنِي أَبُو سَلَمَةَ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، وَسُلَيْمَانُ، بْنُ يَسَارٍ مَوْلَى مَيْمُونَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم عَنْ رَجُلٍ مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مِنَ الأَنْصَارِ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَقَرَّ الْقَسَامَةَ عَلَى مَا كَانَتْ عَلَيْهِ فِي الْجَاهِلِيَّةِ ‏.‏
Sulaiman b. Yasar, the freed slave of Maimuna, the wife of Allah's Apostle (ﷺ), narrated from one of the Ansari Companions of Allah's Messenger (ﷺ) that Allah's Messenger (ﷺ) retained (the practice) of Qasama as it was in the pre-Islamic days

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 28 · The Book of Oaths, Muharibin, Qasas (Retaliation), and Diyat (Blood Money)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।