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सहीह मुस्लिम

नंबर 4339

नंबर 4339किताब 27, नंबर 86अरबी नंबरिंग 997.04
وَحَدَّثَنَاهُ أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، عَنِ ابْنِ عُيَيْنَةَ، قَالَ أَبُو بَكْرٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، قَالَ سَمِعَ عَمْرٌو، جَابِرًا يَقُولُ دَبَّرَ رَجُلٌ مِنَ الأَنْصَارِ غُلاَمًا لَهُ لَمْ يَكُنْ لَهُ مَالٌ غَيْرُهُ فَبَاعَهُ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ قَالَ جَابِرٌ فَاشْتَرَاهُ ابْنُ النَّحَّامِ عَبْدًا قِبْطِيًّا مَاتَ عَامَ أَوَّلَ فِي إِمَارَةِ ابْنِ الزُّبَيْرِ ‏.‏
Jabir is reported to have said:A person amongst the Ansar who had no other property declared a slave free after his death. Allah's Messenger (ﷺ) sold him, and Ibn al-Nahham bought him and he was a Coptic slave (who) died in the first year of the Caliphate of Ibn Zubair

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · The Book of Oaths

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।