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सहीह मुस्लिम

नंबर 4325

नंबर 4325किताब 27, नंबर 72अरबी नंबरिंग 1501.03
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، قَالَ قُلْتُ لِمَالِكٍ حَدَّثَكَ نَافِعٌ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ أَعْتَقَ شِرْكًا لَهُ فِي عَبْدٍ فَكَانَ لَهُ مَالٌ يَبْلُغُ ثَمَنَ الْعَبْدِ قُوِّمَ عَلَيْهِ قِيمَةَ الْعَدْلِ فَأَعْطَى شُرَكَاءَهُ حِصَصَهُمْ وَعَتَقَ عَلَيْهِ الْعَبْدُ وَإِلاَّ فَقَدْ عَتَقَ مِنْهُ مَا عَتَقَ ‏"‏ ‏.‏
Ibn 'Umar reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:He who gives up his share in a slave, and has enough money to pay the full price of the slave, then full emancipation devolves upon him; but if he has not the money, then he emancipated what he emancipated

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · The Book of Oaths

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।