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सहीह मुस्लिम

नंबर 4322

नंबर 4322किताब 27, नंबर 69अरबी नंबरिंग 1666.01
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِذَا أَدَّى الْعَبْدُ حَقَّ اللَّهِ وَحَقَّ مَوَالِيهِ كَانَ لَهُ أَجْرَانِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ فَحَدَّثْتُهَا كَعْبًا فَقَالَ كَعْبٌ لَيْسَ عَلَيْهِ حِسَابٌ وَلاَ عَلَى مُؤْمِنٍ مُزْهِدٍ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:When a slave fulfils obligation of Allah and obligation of his master, he has two rewards for him. I narrated this to Ka'b, and Ka'b said: (Such a slave) has no accountability, nor has a poor believer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · The Book of Oaths

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।