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सहीह मुस्लिम

नंबर 4280

नंबर 4280किताब 27, नंबर 27अरबी नंबरिंग 1651.06
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ، حَدَّثَنَا بَهْزٌ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، حَدَّثَنَا سِمَاكُ بْنُ حَرْبٍ، قَالَ سَمِعْتُ تَمِيمَ بْنَ طَرَفَةَ، قَالَ سَمِعْتُ عَدِيَّ بْنَ حَاتِمٍ، أَنَّ رَجُلاً، سَأَلَهُ فَذَكَرَ مِثْلَهُ وَزَادَ وَلَكَ أَرْبَعُمِائَةٍ فِي عَطَائِي ‏.‏
Tamim b. Tarafa reported:I heard 'Adi b. Hatim say that a person asked that and then narrated (the hadith) like one (mentioned above), but he made this addition:" Here are four hundred (dirhams) for you out of my gift

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · The Book of Oaths

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।