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सहीह मुस्लिम

नंबर 4277

नंबर 4277किताब 27, नंबर 24अरबी नंबरिंग 1651.03
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ طَرِيفٍ الْبَجَلِيُّ، - وَاللَّفْظُ لاِبْنِ طَرِيفٍ - قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ رُفَيْعٍ، عَنْ تَمِيمٍ الطَّائِيِّ، عَنْ عَدِيٍّ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِذَا حَلَفَ أَحَدُكُمْ عَلَى الْيَمِينِ فَرَأَى خَيْرًا مِنْهَا فَلْيُكَفِّرْهَا وَلْيَأْتِ الَّذِي هُوَ خَيْرٌ ‏"‏ ‏.‏
Adi reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:When anyone amongst you takes an oath, but he finds (something) better than that he should expiate (the breaking of the oath), and do that which is better

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · The Book of Oaths

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।