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सहीह मुस्लिम

नंबर 4273

नंबर 4273किताब 27, नंबर 20अरबी नंबरिंग 1650.03
وَحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي أُوَيْسٍ، حَدَّثَنِي عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ الْمُطَّلِبِ، عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ حَلَفَ عَلَى يَمِينٍ فَرَأَى غَيْرَهَا خَيْرًا مِنْهَا فَلْيَأْتِ الَّذِي هُوَ خَيْرٌ وَلْيُكَفِّرْ عَنْ يَمِينِهِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:He who took an oath and (later on) found another thing better than that, he should do that which is better, and expiate for the vow (broken by him)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · The Book of Oaths

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।